कुछ खिलौने हैं
टूटे हैं
किसी घर तक जाने का रास्ता
उन खिलौनों में ज्यों का त्यों धरा है
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ ख़त हैं
महकते हैं
किसी माज़ी तक जाने का रास्ता
उस महकने में ज्यों का त्यों धरा है
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ दिन हैं
बीते हैं
सुबह महकती है उनके बीतने से
बीता तो ये मेरा था
हाथ तुम्हारे क्यों भर गए हैं बीतने से
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ यादें हैं
भारी हैं
कुछ यादों को माँग लाती है
हवा मेरे आँगन की
कुछ यादों को छूने का रास्ता
उन हवाओं में ज्यों का त्यों धरा है
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ हवाएँ हैं
दुखती हैं
कुछ हवाओं में बिखरी नहीं है
दुखती हुई-सी महक कोई
उन हवाओं में खिलती नहीं हूँ मैं
कुछ रास्ते हैं
कुछ भूला नहीं है मन
होता हर बार ये है
कि मेरे साथ-साथ
मेरी सूँघ-सी चली आती है उदासी
कुछ रास्तों पर मिलती नहीं हूँ मैं
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ मौसम हैं
बीते हैं
मेरे हाथ की लिखी कहानी है इनमें
बीता तो ये मेरा था
मन तुम्हारे क्यों भर गए हैं बीतने से
एक पेड़ की छया करब़रार है
कुछ दिन हैं
बच रहे हैं
किसी याद तक जाने का रास्ता
उन दिनों में ज्यों का त्यों धरा है
एक पेड़ की छाया बरक़रार है
कुछ पल हैं
मन के हैं
होता हर बार ये है
कि उन तक जाते-जाते
एक दुख हर बार अटका लेता है मुझे
कुछ दुख हैं
महकते हैं
किसी मन तक जाने का रास्ता
उस महकने में ज्यों का त्यों धरा है
एक दुख की छाया बरक़रार है।








