राम के नाम पर फेंके गए पत्थर से
रहीम के बंदे घायल हुए जाते हैं
मेरे घर आग लगाने की कोशिश में
दोस्त, देख तेरे भी हाथ जले जाते हैं
नया चलन है कि नफ़रत के ज़हर से
दिलों के घाव पर मलहम लगाए जाते हैं
गौतम गांधी के देश में अफ़सोस कि फिर
आदमी के ख़ून से इतिहास लिखे जाते हैं
बाँटा था पहले भी इस धरती को तुमने
अब तो सँभलो कि टुकड़े हुए जाते हैं
वोटों की हवस में देश के रहनुमा
इंसानी लाशों के सौदागर बने जाते हैं
मज़हब और सियासत में फ़र्क़ न कर सके
उस क़ौम के चिराग़े-अज़मत बुझे जाते हैं।








