नफ़रत के ज़हर से

अजीत रायज़ादाअजीत रायज़ादा17 Aug 1947

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राम के नाम पर फेंके गए पत्थर से

रहीम के बंदे घायल हुए जाते हैं

मेरे घर आग लगाने की कोशिश में

दोस्त, देख तेरे भी हाथ जले जाते हैं

नया चलन है कि नफ़रत के ज़हर से

दिलों के घाव पर मलहम लगाए जाते हैं

गौतम गांधी के देश में अफ़सोस कि फिर

आदमी के ख़ून से इतिहास लिखे जाते हैं

बाँटा था पहले भी इस धरती को तुमने

अब तो सँभलो कि टुकड़े हुए जाते हैं

वोटों की हवस में देश के रहनुमा

इंसानी लाशों के सौदागर बने जाते हैं

मज़हब और सियासत में फ़र्क़ न कर सके

उस क़ौम के चिराग़े-अज़मत बुझे जाते हैं।

अजीत रायज़ादा
About the poet

अजीत रायज़ादा

सुपरिचित कवि-लेखक और प्रशासनिक अधिकारी। एक से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। 'हाशिए पर आदमी' उल्लेखनीय कविता-संग्रह। मूल नाम : अजीत रायज़ादा जन्म : 17/08/1947 | सीतापुर, उत्तर प्रदेश अजीत रायज़ादा का जन्म 17 सितंबर 1947 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ। उन्होंने स…

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