About फ़िरोज़ ख़ान
चंबल के बीहड़ों का पड़ोस रखने वाले कवि-पत्रकार। जनवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।
Selected Quotes
Poetry & Stories
लव जेहाद
एकवे घने ऊँचे लहराते दरख़्तों वाले शहर थे
युद्ध के ख़िलाफ़ एक कविता
भले मुझे निष्कासित कर दोइस मुल्क, इस दुनिया-जहान से
यूँ होता
फ़िल्मों की तरहज़िंदगी में भी होता कोई इंटरवल
एक कविता बेटी शीरीं के नाम
एकमेरी आँखों का अधूरा ख़्वाब हो तुम
मर्द रोते नहीं हैं
मूँछों पर ताव देते हुए यही कहते थे दादादादी के इंतक़ाल के बाद जब रो रही थीं घर की औरतें
About फ़िरोज़ ख़ान
चंबल के बीहड़ों का पड़ोस रखने वाले कवि-पत्रकार। जनवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।
फ़िरोज़ ख़ान: Quick Answers
Who is फ़िरोज़ ख़ान?
चंबल के बीहड़ों का पड़ोस रखने वाले कवि-पत्रकार। जनवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।
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Poems & Stories by फ़िरोज़ ख़ान
लव जेहाद
एकवे घने ऊँचे लहराते दरख़्तों वाले शहर थे
युद्ध के ख़िलाफ़ एक कविता
भले मुझे निष्कासित कर दोइस मुल्क, इस दुनिया-जहान से
यूँ होता
फ़िल्मों की तरहज़िंदगी में भी होता कोई इंटरवल
एक कविता बेटी शीरीं के नाम
एकमेरी आँखों का अधूरा ख़्वाब हो तुम
मर्द रोते नहीं हैं
मूँछों पर ताव देते हुए यही कहते थे दादादादी के इंतक़ाल के बाद जब रो रही थीं घर की औरतें
पुलिस
एकसपनों में अक्सर पुलिस आती है
फ़ाशिस्ट
एकजब बच्चे दम तोड़ रहे थे सरकारी अस्पतालों में
राजेंद्र यादव की याद में मर्सिया
वह अब चला गया तो अफ़सोस क्यों हैकिसलिए ये मर्सिए
Selected Quotes by फ़िरोज़ ख़ान (चुनिंदा उद्धरण)
भले मुझे निष्कासित कर दोइस मुल्क, इस दुनिया-जहान सेफ़िल्मों की तरहज़िंदगी में भी होता कोई इंटरवलवह अब चला गया तो अफ़सोस क्यों हैकिसलिए ये मर्सिएमूँछों पर ताव देते हुए यही कहते थे दादादादी के इंतक़ाल के बाद जब रो रही थीं घर की औरतेंVideos on फ़िरोज़ ख़ान
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