चौराहे पर औरत

अजीत रायज़ादाअजीत रायज़ादा17 Aug 1947

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महानगर के व्यस्त चौराहे पर

बत्ती लाल होते ही वह फ़ुटपाथ छोड़कर

अपनी फटी साड़ी में लिपटे हड्डियों के ढाँचे को

लेकर दौड़ पड़ती है

जैसे उसे उठा लाई हो मेडिकल कॉलेज की

एनाटमी क्लास से

लंबी एयरकंडीशंड कार के काले काँचे से

बच्चे को सटाकर वह

करती है बार-बार इशारा

उसके मुँह की तरफ़

आँखों पर काला चश्मा चढ़ाए संभ्रांत स्त्री

अपने पर्स से आईना निकालकर

ठीक करने लगती है लिपस्टिक

उसकी गोद में बैठा पामेरेरियन कुत्ता

यह दृश्य देखकर

अनासक्त भाव से

फिर बंद कर लेता है

अपनी उनींदी आँखें

उधर लाल बत्ती हरी होते ही

चमचमाती सफ़ेद वर्दी वाला ड्राइवर

गियर बदलकर

आगे बढ़ा देता है गाड़ी

पर धँसी हुई आँखोंवाले बच्चे का चेहरा

चिपक जाता है

स्त्री के आईने पर।

अजीत रायज़ादा
About the poet

अजीत रायज़ादा

सुपरिचित कवि-लेखक और प्रशासनिक अधिकारी। एक से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। 'हाशिए पर आदमी' उल्लेखनीय कविता-संग्रह। मूल नाम : अजीत रायज़ादा जन्म : 17/08/1947 | सीतापुर, उत्तर प्रदेश अजीत रायज़ादा का जन्म 17 सितंबर 1947 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ। उन्होंने स…

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