आदमी अपने वर्तमान से
संतुष्ट कभी नहीं रहता
भूतकाल में ही
रहता-जीता-मरता
अगर ऐसा होता
तो वैसा होता
बस यही रटता
रहता है
मन का तोता।
भविष्य के प्रति
आशान्वित कम, आशंकित अधिक
रहना नियति है उसकी
अनागत के भय
अनिष्ट की आशंका
दुष्ट ग्रहों की वक्रदृष्टि
और हाथ की रेखाओं के जाल में
खो जातीहैं
उसको मिली हुई सब ख़ुशियाँ।
अगर जीवन
वास्तव में जीना है
तो आज में जीना सीखो
क्योंकि जी भरकर जिया आज
कल तुम्हारा
सुखद अतीत होगा
यही होगा तुम्हारे
स्वर्णिम भविष्य का
जीवन-बीमा।








