नियति

अजीत रायज़ादाअजीत रायज़ादा17 Aug 1947

1 min read · 12.4K reads

आदमी अपने वर्तमान से

संतुष्ट कभी नहीं रहता

भूतकाल में ही

रहता-जीता-मरता

अगर ऐसा होता

तो वैसा होता

बस यही रटता

रहता है

मन का तोता।

भविष्य के प्रति

आशान्वित कम, आशंकित अधिक

रहना नियति है उसकी

अनागत के भय

अनिष्ट की आशंका

दुष्ट ग्रहों की वक्रदृष्टि

और हाथ की रेखाओं के जाल में

खो जातीहैं

उसको मिली हुई सब ख़ुशियाँ।

अगर जीवन

वास्तव में जीना है

तो आज में जीना सीखो

क्योंकि जी भरकर जिया आज

कल तुम्हारा

सुखद अतीत होगा

यही होगा तुम्हारे

स्वर्णिम भविष्य का

जीवन-बीमा।

अजीत रायज़ादा
About the poet

अजीत रायज़ादा

सुपरिचित कवि-लेखक और प्रशासनिक अधिकारी। एक से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। 'हाशिए पर आदमी' उल्लेखनीय कविता-संग्रह। मूल नाम : अजीत रायज़ादा जन्म : 17/08/1947 | सीतापुर, उत्तर प्रदेश अजीत रायज़ादा का जन्म 17 सितंबर 1947 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ। उन्होंने स…

View profile & all 30 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like