क़ुर्स-ए-ख़ुर को देख कर तस्कीं रख ऐ मेहमान-ए-सुब्ह

पंडित दया शंकर नसीम लखनवीपंडित दया शंकर नसीम लखनवी

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क़ुर्स-ए-ख़ुर को देख कर तस्कीं रख ऐ मेहमान-ए-सुब्ह

ता-दहान-ए-शाम पहुँचाता है राज़िक़ नान-ए-सुब्ह

मअ'नी-ए-रौशन जो हों तो सौ से बेहतर एक शेर

मतला-ए-ख़ुर्शीद काफ़ी है पए-दीवान-ए-सुब्ह

सैर-चश्मी दीद के भूखों की देखो कहती है

मह पनीर-ए-शाम है ख़ुर्शीद-ए-ताबाँ नान-ए-सुब्ह

सदक़े उस पर्वरदिगार-ए-पाक के जिस ने किया

बहर-ए-तिफ़्ल-ए-ग़ुंचा पैदा शीर-ए-बे-पिस्तान-ए-सुब्ह

सुब्ह-दम ग़ाएब हुए 'अंजुम' तो साबित हो गया

ख़ंदा-ए-बेहूदा पर तोड़े गए दंदान-ए-सुब्ह

वस्ल की शब आँख दिखला कर ये अंजुम कहते हैं

लो क़यामत आई मशरिक़ से उठा तूफ़ान-ए-सुब्ह

देखे वो गुलशन जो दिन-दो-दिन रहे याँ मिस्ल-ए-गुल

हम तो शबनम-साँ 'नसीम' एक दम के हैं मेहमान-ए-सुब्ह

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
About the poet

पंडित दया शंकर नसीम लखनवी

उपनाम : 'नसीम' मूल नाम : पंडित दया शंकर कोल जन्म : लखनऊ, उत्तर प्रदेश निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश पंडित दया शंकर नसीम 1811 ई. में लखनऊ में पैदा हुए थे। उनका सम्बंध पंडितों के संभ्रांत और शिक्षित परिवार से था इसलिए उनको भी साहित्य से बेहद दिलचस्पी थी। ज़रूरी शिक्…

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