वहाँ कैसे कोई दिया जले जहाँ दूर तक ये हवा न हो

Nawaz DeobandiNawaz Deobandi16 Jul 1956

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वहाँ कैसे कोई दिया जले जहाँ दूर तक ये हवा न हो

उन्हें हाल-ए-दिल न सुनाइए जिन्हें दर्द-ए-दिल का पता न हो

हों अजब तरह की शिकायतें हों अजब तरह की इनायतें

तुझे मुझ से शिकवे हज़ार हों मुझे तुझ से कोई गिला न हो

कोई ऐसा शे'र भी दे ख़ुदा जो तिरी अता हो तिरी अता

कभी जैसा मैं ने कहा न हो कभी जैसा मैं ने सुना न हो

न दिए का है न हवा का है यहाँ जो भी कुछ है ख़ुदा का है

यहाँ ऐसा कोई दिया नहीं जो जला हो और वो बुझा न हो

मैं मरीज़-ए-इश्क़ हूँ चारागर तू है दर्द-ए-इश्क़ से बे-ख़बर

ये तड़प ही उस का इलाज है ये तड़प न हो तो शिफ़ा न हो

Nawaz Deobandi
About the poet

Nawaz Deobandi

DescriptionMohammad Nawaz Khan Hindi: नवाज देवबंदी Urdu:نواز دیوبندی born 16 Jul 1956 is an Indian Urdu language poet born in Deoband, India. He is also a Gazhals writer some of them are sung by famous Gazhal singer Jagjit Singh.

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