नैना निपट बंकट छबि अटके।
देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।
बारिज भवाँ अलक टेढी मनौ, अति सुगंध रस अटके॥
टेढी कटि, टेढी कर मुरली, टेढी पाग लट लटके।
'मीरा प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के॥
नैना निपट बंकट छबि अटके।
देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।
बारिज भवाँ अलक टेढी मनौ, अति सुगंध रस अटके॥
टेढी कटि, टेढी कर मुरली, टेढी पाग लट लटके।
'मीरा प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के॥

Mirabai , was a 16th-century Hindu mystic poet and devotee of Krishna. She is a celebrated Bhakti saint, particularly in the North Indian Hindu tradition. Mirabai was born into a Rajput royal family in Kudki, Pali district, Rajasthan, India then spent her chi…
View profile & all 28 Poems / Storiesनहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।
हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरीश्याम मैं बादल देख डरी
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो।वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥