हेरी म्हा दरद दिवाणौ
म्हारा दरद ना जाण्याँ कोय ।
घायल री गत घायल जाण्याँ
हिबडो अगण संजोय ॥
जौहर की गत जौहरी जाणै
क्या जाण्याँ जण खोय
मीरा री प्रभु पीर मिटाँगा
जब वैद साँवरो होय ॥
हेरी म्हा दरद दिवाणौ
म्हारा दरद ना जाण्याँ कोय ।
घायल री गत घायल जाण्याँ
हिबडो अगण संजोय ॥
जौहर की गत जौहरी जाणै
क्या जाण्याँ जण खोय
मीरा री प्रभु पीर मिटाँगा
जब वैद साँवरो होय ॥

Mirabai , was a 16th-century Hindu mystic poet and devotee of Krishna. She is a celebrated Bhakti saint, particularly in the North Indian Hindu tradition. Mirabai was born into a Rajput royal family in Kudki, Pali district, Rajasthan, India then spent her chi…
View profile & all 28 Poems / Storiesनहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।
हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥
नैना निपट बंकट छबि अटके।देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरीश्याम मैं बादल देख डरी