लाल्टू, poet
Sootradhar · Author

लाल्टू

लाल्टू

10 September 1957कोलकाता, भारत

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Selected Quotes

मैं फूल हूँधूप की तरफ़ मुड़ता हुआ
— लाल्टू
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मिट्टी मिलती है मिट्टी मेंयही देखकर ख़ुश हैं लोग
— लाल्टू
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Poetry & Stories

  1. लोग ही चुनेंगे रंग

    चुप्पी के ख़िलाफ़किसी विशेष रंग का झंडा नहीं चाहिए

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  2. नाज़ुक

    जिस्म बड़ी नाज़ुक चीज़ है। छोटी-सी छुरी चमड़ा चीर देती है और जिस्म में हर कुछ जो ठोस है धराशायी हो जाता है। फ़ौज-पुलिस के गोली-डंडे ठोस हड्डियों को चूरमचूर कर देते हैं। विज्ञान में ठोस और द्रव का फ़र्क़ पढ़ते हैं, बहता तो पूरा जिस्म है। गोलियों से छलनी जिस्म में से ठोस सपने उड़ जाते हैं और किसी और नाज़ुक जिस्म में बस जाते हैं। धरती और आस्माँ भी नाज़ुक हैं। खरबों साल बाद आग का गोला जो सूरज है, ठोस दिखता गैस का बवंडर ख़त्म हो जाएगा। आख़िर में कोई नहीं जीतता, न इंसान, न आस्माँ। फ़ौज-पुलिस तो कभी नहीं जीतती।सचमुच ठोस है वह जो हर किसी को नाज़ुक दिखता है—प्यार।

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  3. मैं और तुम

    मैं फूल हूँधूप की तरफ़ मुड़ता हुआ

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  4. विसर्जन

    मिट्टी मिलती है मिट्टी मेंयही देखकर ख़ुश हैं लोग

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  5. कविता

    बहुत बड़ा शहरबहुत बड़ा अँधेरा

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