मैं फूल हूँ
धूप की तरफ़ मुड़ता हुआ
मैं फल हूँ
यात्राओं में रुक कर स्वाद लेने लायक़
या मैं हूँ भरा-पूरा पेड़
शाख़ाओं से जड़ें लटकाता
देख रहे हो मेरी शक्ल
टेढ़ा दिखता हूँ
सीधी राहों पर चलने वालों के लिए
चिरंतन टेढ़ी नाक हूँ
दुखती है गर्दन जब देखोगे मुझे
इन दुखों के अलावा देने को और
है भी क्या मेरे पास
मेरी दुनिया सुई से भी बारीक दुनिया है
नैनोमीटर दूरियों में बहता है प्राण
जब तक तुम लेते हो चुंबन
मैं चूम चुका होता हूँ अरबों बार
पलकें झपक गई होती हैं अरबों बार
अरबों दुखों का भंडार है मेरे पास
तुम्हारा मन हरा है
इक पेड़ है
पत्तियों से लदा
तुम प्रकाश की छाया हो
तुम विस्तार हो प्रकाश वर्षों का
अनंत बार तुम में छिपता हूँ
अनंत धरतियाँ सुबकती हैं








