मैं तुमसे क्या ले सकता हूँ?

लाल्टूलाल्टू10 Sept 1957

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मैं तुमसे क्या ले सकता हूँ?

अगर ऐसा पूछो तो मैं क्या कहूँगा।

बीता हुआ वक़्त तुमसे ले सकता हूँ क्या?

शायद ढलती शाम तुम्हारे साथ बैठने का सुख ले सकता हूँ

जब थका हुआ हूँ, तुम्हारा कहना,

तुम तो बिल्कुल थके नहीं हो, मुझे मिल सकता है।

तुम्हें मुझसे क्या मिल सकता है?

मेरी दाढ़ी किसी काम की नहीं।

तुम इससे आतंकित होती हो।

असहाय लोगों के साथ जब खड़ी होती हो, मेरा साथ तुम्हें मिल सकता है

बाक़ी बस हँसी-मज़ाक़, कभी थोड़ा उजड्डपना, यह ऊपरी।

यह जो पत्तों की सरसराहट है, मुझे किसी की पदचाप लगती है,

मुझे पागल तो नहीं कहोगी न?

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