विसर्जन

लाल्टूलाल्टू10 Sept 1957

1 min read · 12.4K reads

मिट्टी मिलती है मिट्टी में

यही देखकर ख़ुश हैं लोग

या लोगों की ख़ुशी देखकर ख़ुश

होता है पानी में घुल रहा ईश्वर

बड़ा है ईश्वर तो बड़ी है झील

छोटा-सा ईश्वर ख़ुश है

छोटे तालाब में ही विसर्जित होकर।

लाल्टू
About the poet

लाल्टू

View profile & all 50 Poems / Stories

More from लाल्टू

  1. लोग ही चुनेंगे रंग

    चुप्पी के ख़िलाफ़किसी विशेष रंग का झंडा नहीं चाहिए

    12.4K reads
  2. नाज़ुक

    जिस्म बड़ी नाज़ुक चीज़ है। छोटी-सी छुरी चमड़ा चीर देती है और जिस्म में हर कुछ जो ठोस है धराशायी हो जाता है। फ़ौज-पुलिस के गोली-डंडे ठोस हड्डियों को चूरमचूर कर देते हैं। विज्ञान में ठोस और द्रव का फ़र्क़ पढ़ते हैं, बहता तो पूरा जिस्म है। गोलियों से छलनी जिस्म में से ठोस सपने उड़ जाते हैं और किसी और नाज़ुक जिस्म में बस जाते हैं। धरती और आस्माँ भी नाज़ुक हैं। खरबों साल बाद आग का गोला जो सूरज है, ठोस दिखता गैस का बवंडर ख़त्म हो जाएगा। आख़िर में कोई नहीं जीतता, न इंसान, न आस्माँ। फ़ौज-पुलिस तो कभी नहीं जीतती।सचमुच ठोस है वह जो हर किसी को नाज़ुक दिखता है—प्यार।

    12.4K reads
  3. मैं और तुम

    मैं फूल हूँधूप की तरफ़ मुड़ता हुआ

    12.4K reads
  4. कविता

    बहुत बड़ा शहरबहुत बड़ा अँधेरा

    12.4K reads
  5. वह आदमी बस के इंतज़ार में

    वह आदमी बस के इंतज़ार मेंसड़क के तक़रीबन बीचोंबीच आ खड़ा है

    12.4K reads

More Poetry & Stories You May Like