मिट्टी मिलती है मिट्टी में
यही देखकर ख़ुश हैं लोग
या लोगों की ख़ुशी देखकर ख़ुश
होता है पानी में घुल रहा ईश्वर
बड़ा है ईश्वर तो बड़ी है झील
छोटा-सा ईश्वर ख़ुश है
छोटे तालाब में ही विसर्जित होकर।
मिट्टी मिलती है मिट्टी में
यही देखकर ख़ुश हैं लोग
या लोगों की ख़ुशी देखकर ख़ुश
होता है पानी में घुल रहा ईश्वर
बड़ा है ईश्वर तो बड़ी है झील
छोटा-सा ईश्वर ख़ुश है
छोटे तालाब में ही विसर्जित होकर।

चुप्पी के ख़िलाफ़किसी विशेष रंग का झंडा नहीं चाहिए
जिस्म बड़ी नाज़ुक चीज़ है। छोटी-सी छुरी चमड़ा चीर देती है और जिस्म में हर कुछ जो ठोस है धराशायी हो जाता है। फ़ौज-पुलिस के गोली-डंडे ठोस हड्डियों को चूरमचूर कर देते हैं। विज्ञान में ठोस और द्रव का फ़र्क़ पढ़ते हैं, बहता तो पूरा जिस्म है। गोलियों से छलनी जिस्म में से ठोस सपने उड़ जाते हैं और किसी और नाज़ुक जिस्म में बस जाते हैं। धरती और आस्माँ भी नाज़ुक हैं। खरबों साल बाद आग का गोला जो सूरज है, ठोस दिखता गैस का बवंडर ख़त्म हो जाएगा। आख़िर में कोई नहीं जीतता, न इंसान, न आस्माँ। फ़ौज-पुलिस तो कभी नहीं जीतती।सचमुच ठोस है वह जो हर किसी को नाज़ुक दिखता है—प्यार।
मैं फूल हूँधूप की तरफ़ मुड़ता हुआ
बहुत बड़ा शहरबहुत बड़ा अँधेरा
वह आदमी बस के इंतज़ार मेंसड़क के तक़रीबन बीचोंबीच आ खड़ा है