बाहर अंदर

लाल्टूलाल्टू10 Sept 1957

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बाहर लू चलने को है

जो कमरे में बंद हैं क़िस्मत उनकी

क़ैद में ही सुकून

ख़ूबसूरत सपनों में लू नहीं चलती

यह बात और कि कमरे में बंद

आदमी के सपने ख़ूबसूरत नहीं होते

कोई है कि वक़्त की क़ैद में है

बाहर लू चलने को है।

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