नाक

प्रताप सोमवंशीप्रताप सोमवंशी20 Sept 1968

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सूंघ तो लेती है सबकुछ
सही और सटीक
बोलने से बचती है
संकोची है आंखों से भी ज्यादा
डरती है मर्यादा के मूर्तिभंजन से
इसलिए सांस लेने में संकट हो तब भी
अकसर चुप रहती है नाक

प्रताप सोमवंशी
About the poet

प्रताप सोमवंशी

#PratapSomvanshi अपने भीतर है जो इंसान बचाकर रखना अपनी मिट्टी की ये पहचान बचाकर रखना परिचय. जन्म : 2 नवंबर 1968.

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