जीवन कितना हल्का होता है
किसी आदमी को
अंक में भरकर देखो,
देखो उल्लास में उठाकर;
मृत्यु कितनी भारी होती है,
महसूस करो
किसी को देते हुए कंधा,
रखते हुए चिता पर
ख़ामोश हुई देह!
जीवन कितना हल्का होता है
किसी आदमी को
अंक में भरकर देखो,
देखो उल्लास में उठाकर;
मृत्यु कितनी भारी होती है,
महसूस करो
किसी को देते हुए कंधा,
रखते हुए चिता पर
ख़ामोश हुई देह!

नई पीढ़ी के कवि-ग़ज़लकार। निम्नमध्यवर्गीय संवेदना के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : लक्ष्मण गुप्त जन्म : 03/01/1983 | पूर्वी चंपारण, बिहार
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