जीवन और मृत्यु

लक्ष्मण गुप्तलक्ष्मण गुप्त3 Jan 1983

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जीवन कितना हल्का होता है

किसी आदमी को

अंक में भरकर देखो,

देखो उल्लास में उठाकर;

मृत्यु कितनी भारी होती है,

महसूस करो

किसी को देते हुए कंधा,

रखते हुए चिता पर

ख़ामोश हुई देह!

लक्ष्मण गुप्त
About the poet

लक्ष्मण गुप्त

नई पीढ़ी के कवि-ग़ज़लकार। निम्नमध्यवर्गीय संवेदना के लिए उल्लेखनीय। मूल नाम : लक्ष्मण गुप्त जन्म : 03/01/1983 | पूर्वी चंपारण, बिहार

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