मई 2021

हरिओम राजोरियाहरिओम राजोरिया8 Sept 1964

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बहुत लोगों से आँख नहीं मिला पा रहा

बहुत लोगों के पास नहीं जा पा रहा

एक मृत्यु समाचार के आने की आशंका है

दूसरा मृत्यु समाचार उससे पहले आ गया

ये घंटी किसकी बज रही है

किसका मोबाइल घनघना रहा है

कल नंदू हलवाई नहीं रहे थे

मरने वालों में आज

विष्णु और प्रेमनारायण कक्कू का नाम आ रहा है

संतोष, आदित्य, रवींद्र, ज़ाहिद, पयोधि

संज्ञा, समीर, अनीश, सतीश, सोनल

पता नहीं कितने साथियों के

घर के बुज़ुर्ग चले गए

सिरसी-पछार की मीना बहिनजी चली गईं

टेलीफ़ोन वाले राठौर साहब चले गए

इतिहास के कीड़ा रामभरोसे न रहे

चले गए अँग्रेज़ी वाले सक्सेना साहिब

कुंभ से लौटे रज्जु मौसा चले गए

वकील साहिब चले गए

गिरदावर साहिब चले गए

ऊँचे-ऊँचे ओहदे वाले चले गए

जवान-जवान लड़के चले गए

छोटी बहर की ग़ज़ल कहने वाले

गुना के रामलखन चले गए

चित्रकार, कवि, फ़ोटॉग्राफ़र चले गए

तनक़ीद निगार चले गए

तहज़ीब के आलिम चले गए

बैंकर, इंजीनियर, थानेदार चले गए

किराना किंग, बैंड मास्टर, लंबरदार चले गए

तूफ़ान के चलते तेज़ हवा चल रही है

अस्पतालों में भी कोरोना टेस्टिंग चल रही है

नदी किनारे बालू के नीचे दबी लोथ

भीतर ही भीतर कसमसा रही है

पता नहीं ये किसकी अस्थियों की थैली है

कौन इसे नीम की डगाल पर टाँग गया

एक लड़के की पीठ पर बेंत के निशान है

एक लड़का अस्थि-संचय के लिए

हैंडपंप पर कोरा घड़ा भर रहा है

एक आंटी की खोज में बाज़ार गया था

पर चौराहे पर मुर्ग़ा बना बैठा है

कोरोना केस कम हो रहे हैं

मृत्यु भय कम नहीं हो रहा

अस्पताल इससे पहले

इतने डरावने कभी नहीं थे

जन नेता नियति का रोना रोकर

हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं

ठेके के आदमी काम की तरह

अपरिचितों की लाशें जला रहे हैं

इस बार की मई में

गर्मी से ज़्यादा उमस है।

हरिओम राजोरिया
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हरिओम राजोरिया

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