हम भारत के लोग

फ़रीद ख़ाँफ़रीद ख़ाँ

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मैं चूँकि नागरिक हूँ अपने देश का।

मैं देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हूँ।

मेरा फ़र्ज़ बनता है कि अपने मातहत काम करने वाले

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सर्वोच्च न्यायाधीश की आलोचना करूँ।

अपने कर्मचारियों की आलोचना से उनकी कार्य-कुशलता बनी रहती है।

इसीलिए मैं अपने साथी नागरिकों से भी अपील करता हूँ

कि वे जितना अपने घर में काम करने वाले कर्मचारियों की आलोचना करते हैं,

ताकि रोटियाँ अच्छी पक सकें और घर में साफ़ सफ़ाई बरक़रार रहे,

उतनी ही आलोचना राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री

या सर्वोच्च न्यायाधीश की किया करें।

हम भारत के लोग यह वचन लें।

फ़रीद ख़ाँ
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फ़रीद ख़ाँ

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