न खाता न बही है
जो तुम बोलो, वही है
न्यूज़ ये छप रही है
सब कुछ बिल्कुल सही है
मगर
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
ख़ाक हुए अरमान क्यों
शहर हुआ सुनसान क्यों
धधक रहे श्मशान क्यों
साँसों पर घमासान क्यों
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
सिस्टम का है बुरा हाल क्यों
नहीं मिल रहे अस्पताल क्यों
ऑक्सीजन का है अकाल क्यों
इंजेक्शन पर है बवाल क्यों
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
सच पर एफ़आईआर क्यों
रासुका की मार क्यों
झूठ की जय-जयकार क्यों
निष्ठुर है सरकार क्यों
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
यूँ ख़तरे में जान क्यों
जारी है मतदान क्यों
रैली आलीशान क्यों
बनते हो अनजान क्यों
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
होगा ये संजोग कब
बीतेगा ये सोग कब
हारेगा ये रोग कब
समझोगे तुम लोग कब
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
न खाता न बही है
जो तुम बोलो, वही है
न्यूज़ ये छप रही है
सब कुछ बिल्कुल सही है
मगर
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ
मेरे शहर के हैं सवाल कुछ








