ताली

फ़रीद ख़ाँफ़रीद ख़ाँ

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एक ताली हमारी नाकामी के लिए।

माफ़ कीजिए, एक ताली हमारी नाकामी को ढँकने के लिए।

जैसे मुँह ढँकते हैं मास्क लगा कर, वैसे ही।

फिर एक ताली उन मज़दूरों के लिए जो ट्रेन से कट गए

यहाँ फिर से एक बार माफ़ी,

यह वाली ताली उनकी याद मिटाने के लिए बजाएँ

और उस औरत की भी याद मिटाने के लिए

जो रास्ते भर प्रसव पीड़ा में रही

और अंत में जन्म दिया एक बच्चे को जो मर गया।

मन में कोई नकारात्मक विचार नहीं होना चाहिए।

हज़ार-हज़ार किलोमीटर दूर पैदल चलने वालों की तस्वीर

मन में अवसाद भरती है और हमें अवसाद से ही लड़ना है।

इसलिए एक ताली उन तस्वीरों के लिए

जिनमें फूल खिलते हैं और परिंदे कलरव करते हैं

और उन तस्वीरों को खींचने वालों के लिए भी एक ताली

जिसने महामारी में भी वक़्त निकाला हमारे लिए।

हम थाली बजा कर भी अपना मनोबल बनाए रख सकते हैं

या मोमबत्ती जला कर इस देश को श्रद्धांजलि भी दे सकते हैं।

फ़रीद ख़ाँ
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फ़रीद ख़ाँ

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