धीरे-धीरे
चढ़ती हैं आवाज़ें
क़ुतुब मीनार पर
धीरे-धीरे
चढ़ते हैं रंग
आसमान में
धीरे-धीरे
सीखता है बच्चा
चलना
धीरे-धीरे
चिड़िया पा लेती है
उड़ना
धीरे-धीरे
धरती पर होता है
जन्मना
धीरे-धीरे
मिट्टी की गोद में
समाना
बहुत कुछ
इसी तरह से
धीरे-धीरे ही घटित होता है
मगर
बहुत कुछ
इसी तरह से
धीरे-धीरे नहीं
जल्दी-जल्दी घटित होता है
जल्दी-जल्दी
बदलती हैं शक्लें
आकांक्षाएँ
जल्दी-जल्दी
बढ़ आते हैं हमारे
नाख़ून
जल्दी-जल्दी
चौराहों पर बहता है
ख़ून
जल्दी-जल्दी
दीवारें होती हैं
राख
जल्दी-जल्दी
देह हो जाती है
भाप
जल्दी-जल्दी
गिरते हैं
किरदार
जल्दी-जल्दी
शूली पर लटकता है
प्यार!








