सांत्वना

भालचंद्र नेमाड़ेभालचंद्र नेमाड़े27 May 1938

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पीछे है दीवार तुम्हारी, दीवार पर

चिड़ियों का घोंसला, सखि

खाली है कंधा तब तक

लो दीवार पर पातारा, आँखें सूनी दुबारा घनी नहीं हों

न आए आँसू दुबारा।

गया सुख

रेंगता हुआ, घर में अभी तक

यूँ ही छलकती है झूला भर लय

है गौरैया गौरैया पीछे, चुनेगी

दुपहर में दहलीज़ में मौन खम्भों का

यह उनका हुआ, खड़ी दीवार का हुआ।

आँखों का भार न हो पल्लू को, सखी

बुनाई तुम्हारे पल्लू की सलामत रहे।

भालचंद्र नेमाड़े
About the poet

भालचंद्र नेमाड़े

मराठी के समादृत कवि-लेखक और समालोचक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित। मूल नाम : भालचंद्र वनाजी नेमाडे जन्म : 27/05/1938 | काजगाँव, महाराष्ट्र

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