पीछे है दीवार तुम्हारी, दीवार पर
चिड़ियों का घोंसला, सखि
खाली है कंधा तब तक
लो दीवार पर पातारा, आँखें सूनी दुबारा घनी नहीं हों
न आए आँसू दुबारा।
गया सुख
रेंगता हुआ, घर में अभी तक
यूँ ही छलकती है झूला भर लय
है गौरैया गौरैया पीछे, चुनेगी
दुपहर में दहलीज़ में मौन खम्भों का
यह उनका हुआ, खड़ी दीवार का हुआ।
आँखों का भार न हो पल्लू को, सखी
बुनाई तुम्हारे पल्लू की सलामत रहे।








