लबालब साँय-साँय

भालचंद्र नेमाड़ेभालचंद्र नेमाड़े27 May 1938

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लबालब साँय-साँय

उसकी घनी आँखों में

सघोष आलिंगन हवा का

उसकी सभी

घास-दर्रे की रंग-बिरंगी

फूटी बन-झाँकी

नागफनी की तृप्ति

कँटीली नंगई

बादलों से घिरे हरे घन शिखरों का

प्यारा-सा एहसास उसका

सागबन फुनगियों, तनों से

गुण गूँथकर

किनारी-किनारी बुनने वाली

चू रही झर-झर

आँखों पर

लबालब दह आलिंगन

सीने पर

सभी पखेरू-पंछियों की बातें।

भालचंद्र नेमाड़े
About the poet

भालचंद्र नेमाड़े

मराठी के समादृत कवि-लेखक और समालोचक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित। मूल नाम : भालचंद्र वनाजी नेमाडे जन्म : 27/05/1938 | काजगाँव, महाराष्ट्र

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