लबालब साँय-साँय
उसकी घनी आँखों में
सघोष आलिंगन हवा का
उसकी सभी
घास-दर्रे की रंग-बिरंगी
फूटी बन-झाँकी
नागफनी की तृप्ति
कँटीली नंगई
बादलों से घिरे हरे घन शिखरों का
प्यारा-सा एहसास उसका
सागबन फुनगियों, तनों से
गुण गूँथकर
किनारी-किनारी बुनने वाली
चू रही झर-झर
आँखों पर
लबालब दह आलिंगन
सीने पर
सभी पखेरू-पंछियों की बातें।








