About भालचंद्र नेमाड़े
मराठी के समादृत कवि-लेखक और समालोचक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित। मूल नाम : भालचंद्र वनाजी नेमाडे जन्म : 27/05/1938 | काजगाँव, महाराष्ट्र
Selected Quotes
Poetry & Stories
कवि लोग
मधुमक्खियों की तरह इकट्ठा हुए हम खदेड़ी गईं मधुमक्खियों की तरहडालकर मक्खी खेप छत्ते पर बैठते ही गिर गए हम धुआँ धधकती आग में
सांत्वना
पीछे है दीवार तुम्हारी, दीवार परचिड़ियों का घोंसला, सखि
लबालब साँय-साँय
लबालब साँय-साँयउसकी घनी आँखों में
भूरे बियाबान को मिट्ठू छोड़ चले
भूरे बियाबान को मिट्ठू छोड़ चलेउड़ना चाहती हैं पहाड़ों की भी कतारें तलहटी उठाए
हम तमाम
बेंच पर कहीं चूतड़ भर जगह मिल जाए तो हम तमामसब कुछ सीधा गाड़ी सीधी पटरी सीधी
About भालचंद्र नेमाड़े
मराठी के समादृत कवि-लेखक और समालोचक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।
मूल नाम : भालचंद्र वनाजी नेमाडेजन्म : 27/05/1938 | काजगाँव, महाराष्ट्र
मराठी के समादृत कवि-लेखक और समालोचक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित। भालचंद्र नेमाड़े was born on 27 May 1938. Associated place: काजगाँव, महाराष्ट्र. Kavishala has 5 poems and stories by भालचंद्र नेमाड़े, free to read on this page, along with selected quotes you can share.भालचंद्र नेमाड़े: Quick Answers
Who is भालचंद्र नेमाड़े?
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Poems & Stories by भालचंद्र नेमाड़े
कवि लोग
मधुमक्खियों की तरह इकट्ठा हुए हम खदेड़ी गईं मधुमक्खियों की तरहडालकर मक्खी खेप छत्ते पर बैठते ही गिर गए हम धुआँ धधकती आग में
सांत्वना
पीछे है दीवार तुम्हारी, दीवार परचिड़ियों का घोंसला, सखि
लबालब साँय-साँय
लबालब साँय-साँयउसकी घनी आँखों में
भूरे बियाबान को मिट्ठू छोड़ चले
भूरे बियाबान को मिट्ठू छोड़ चलेउड़ना चाहती हैं पहाड़ों की भी कतारें तलहटी उठाए
हम तमाम
बेंच पर कहीं चूतड़ भर जगह मिल जाए तो हम तमामसब कुछ सीधा गाड़ी सीधी पटरी सीधी
Selected Quotes by भालचंद्र नेमाड़े (चुनिंदा उद्धरण)
पीछे है दीवार तुम्हारी, दीवार परचिड़ियों का घोंसला, सखिभूरे बियाबान को मिट्ठू छोड़ चलेउड़ना चाहती हैं पहाड़ों की भी कतारें तलहटी उठाएमधुमक्खियों की तरह इकट्ठा हुए हम खदेड़ी गईं मधुमक्खियों की तरहडालकर मक्खी खेप छत्ते पर बैठते ही गिर गए हम धुआँ धधकती आग मेंबेंच पर कहीं चूतड़ भर जगह मिल जाए तो हम तमामसब कुछ सीधा गाड़ी सीधी पटरी सीधीलबालब साँय-साँयउसकी घनी आँखों मेंVideos on भालचंद्र नेमाड़े
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