वृंदावनी धुन

बेबी शॉबेबी शॉ

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कीर्तन जो मैं गाता हूँ

यमन राग है जो रात

अँधेरा वृंदावनी धुनों के साथ

जो मेरे पास सोता है

वह मेरी वासना है

वह मेरी सुबह की ओस है

वह मेरे नहाने का पानी है

वह है मेरे होंठों की मिठास

बात जो संचारी में

रुद्रवीणा की लय में झूम उठती है

मैं एक सुंदर गीत हूँ

मैं एक सुंदर कविता हूँ

मैं रवींद्रतीर्थ में एकाकी उदासी खींचता हूँ

राधा की आँख...

मैं विसर्जन हूँ

मैं कृष्णचुरा गीत हूँ

मैं अपना अंश हूँ

कण-कण में संधिपूजा की पत्तियाँ हूँ मैं

मैं रोता हुआ,

धूल भरा पागल भजन हूँ

मैंने तुम्हें सब कुछ दिया

अभिसार,

तुम ही वैष्णव बनो...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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