तुम

बेबी शॉबेबी शॉ

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सोचते हुए

सोचते हुए

दिन भर सोचते हुए

तुम्हारा एक अवयव

आकार लेता है :

देवी माँ की तरह

आँख, हाथ, कान... दृश्य

चराचर

भूमि, जल, अम्बर

शून्य

अस्ति

नास्ति...

मैं ख़ुश हो जाती हूँ

सोचती हूँ

ये तुम

कितने पास

कितने सुंदर

महसूस करती हूँ तुम्हें

और रो पड़ती हूँ

मैं तुम्हें सोचती हुई

तुम्हारी पूजा में रहती हूँ

मेरे प्रेम...

तुम मेरा साधन बन जाओ

तुम मेरी इच्छा

पूजा भी...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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