हम उस दिन

बेबी शॉबेबी शॉ

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इतनी सारी बाधाएँ

आ जाती हैं

हमारे बीच

इतनी सारी बाधाएँ

तुम ज़्यादा मत सोचो, प्यार

तुम इतने भी बेचैन मत रहो

शांत—युद्धमुक्त

एक नगर

एक संसार

ज़रूर होगा

एक रोज़ ज़रूर

एक निराला पहाड़

शस्य श्यामला खेती

पानी से भरी परिपुष्ट नदी—

पक्षियों के गीत—

बहुत समय तक

अवसर देंगे हमें

हम उस दिन

उद्यापन करेंगे

अपनी भाषा का

शब्द और प्रेमपूर्ण राग का

पत्र की गंभीर वर्णमाला

और एक कहानी

शानदार लेकिन शांत

सहज लेकिन सुंदर

जो तुम्हारी और मेरी

सिर्फ़ हम दोनों की...

निर्जन शांत भूमि

और सितारों के बीच

ज़रूर एक रोज़

एक पल आएगा ऐसा

जब हम दोनों के बीच

बहुत वक़्त से जमा हुआ

बहुत-बहुत

वक़्त से जमा हुआ

सब कुछ पिघल जाएगा...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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