धीरे-धीरे तुम छू लेते हो
मेरे नयन
मेरे कान
मेरे खुले बाल
पैरों में झूम उठता है आलता
झूम उठती है पायल
हरसिंगार दे देते हो हाथों में तुम
दोलनचम्पा मेरी कमर में खिल उठती है
तुम छू लेते हो मेरा पूरा शरीर
मैं काँप उठती हूँ
मैं ज़िंदा होने लगती हूँ
और तुम
चूम लेते हो
मंत्र
वाणी
मुग्धता
जग-जगत
इसे ही मान लेता है
पुण्यतिथि
पूजा!








