रेलपथ

बेबी शॉबेबी शॉ

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तुमने कभी नहीं सोचा था

कि तुम इतना रोओगे

एक हज़ार चार सौ नौ किलोमीटर दूर है

राजधानी

इतना रोना स्वास्थ्य के लिए

अच्छी बात नहीं है

अगर रोना ज़्यादा गाढ़ा हो तो

रेलयात्री मुसीबत में पड़ जाएँगे

और रेल का जो अपना

इतिहास है

कहानी है

भूगोल है

सब मिट रहा है

क़ीमती आँसुओं से...

रेल का यह भारी नुक़सान

राष्ट्र के लिए अच्छी ख़बर हो सकती है

लेकिन,

मैं कैसे जिऊँगी...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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