जन्मदिन

बेबी शॉबेबी शॉ

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तुम्हें सोचते हुए

रोज़

एक नई दुनिया रचती हूँ

मिट्टी के चावल

धूल की सब्ज़ी

पत्ते की रोटी

खेल-घर जैसी...

एक ऐसी दुनिया

जिसे कोई नहीं जानता

जहाँ

प्रकाश-लोभ से

स्वयं को जलाती हूँ मैं...

बेबी शॉ
About the poet

बेबी शॉ

नई पीढ़ी की सुपरिचित-सम्मानित बांग्ला कवि-गद्यकार-अनुवादक। बारह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी में भी कविताएँ लिखती हैं।

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