About आसित आदित्य
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।
Selected Quotes
Poetry & Stories
ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
याद करोवो बचपन―
फ़ासला तो है मगर कोई फ़ासला नहीं
समय की पगडंडी परभागी जा रही है ज़िंदगी की खटारा दुपहिया
कटे पंखों वाली एक चिड़िया का उड़ जाना
कई दिनों सेहम बार-बार खोलते रहे थे
कोलतार की सड़क और गेहूँ के बालियों पर झूमता जीवन
स्मृतियाँ―दिल के जेब के सबसे अनमोल ख़ज़ाने हैं।
नदी तीरे भादो की एक रात
करती है आग्रहडपट भी देती है कभी-कभी—
About आसित आदित्य
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।
आसित आदित्य: Quick Answers
Who is आसित आदित्य?
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।
Where can I read आसित आदित्य's poetry?
Kavishala has 40 poems and stories by आसित आदित्य, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by आसित आदित्य
ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
याद करोवो बचपन―
फ़ासला तो है मगर कोई फ़ासला नहीं
समय की पगडंडी परभागी जा रही है ज़िंदगी की खटारा दुपहिया
कटे पंखों वाली एक चिड़िया का उड़ जाना
कई दिनों सेहम बार-बार खोलते रहे थे
कोलतार की सड़क और गेहूँ के बालियों पर झूमता जीवन
स्मृतियाँ―दिल के जेब के सबसे अनमोल ख़ज़ाने हैं।
नदी तीरे भादो की एक रात
करती है आग्रहडपट भी देती है कभी-कभी—
कुछ अनकही बातें
वह जिसने खो दिया था स्वयं को मुझमें कहींउसका हृदय छोटी-छोटी ख़ुशियों का संग्रहालय था।
अंतिम समय, अंतिम विनती, अंतिम आश्वस्ति
चलना, चलना और चलनाफिर एक ठोकर का लगना और बैठ जाना...
एक और तारे के टूटने के बाद
जिसकी नंग-धड़ंग नाख़ूनों के ख़रोचों से सजाई गई लाशभोरे-भोर तुम्हें भुतही बसवाड़ी के पास मिली है,
सबके हिस्से नहीं आती कश्ती, न सावन, न बारिश का पानी
सनकी पुरातत्त्वविद् की भाँतिउठाता है कुदाल
ईश्वर की सबसे कुरूप रचना
नंगी पीठ पर फिसलते पसीने की मानिंदअंतरिक्ष में फिसलता टूटा तारा होना था मुझे।
चाहना और पाना
मैंने चाहाकि ज़िंदगी हो
कुछ सुझाव धरती पर
मोहब्बत में आज़ादी हार जाने काअपना सुख है
Selected Quotes by आसित आदित्य (चुनिंदा उद्धरण)
जिसकी नंग-धड़ंग नाख़ूनों के ख़रोचों से सजाई गई लाशभोरे-भोर तुम्हें भुतही बसवाड़ी के पास मिली है,चलना, चलना और चलनाफिर एक ठोकर का लगना और बैठ जाना...करती है आग्रहडपट भी देती है कभी-कभी—सनकी पुरातत्त्वविद् की भाँतिउठाता है कुदालनंगी पीठ पर फिसलते पसीने की मानिंदअंतरिक्ष में फिसलता टूटा तारा होना था मुझे।मैंने चाहाकि ज़िंदगी होVideos on आसित आदित्य
Loading videos…
Books by आसित आदित्य
Loading books…








