ब्राह्ममुहूर्त्त

बालमणि अम्माबालमणि अम्मा19 Jul 1909 – 29 Sept 2004

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रात के अंतिम पहर में जब मैं उठी तो

माँ तू नीले वस्त्रों में लिपटी ऊँघ रही थी

तो मैंने तुम्हारे वक्ष के आर्द्रमाधुर्य को चूसा।

मोहालस्य निमिषों के सौंदर्य को समझा मैंने

शांति गंध से भरे उच्छ्वासों को महसूस किया मैंने

लहरों से लहराते सागर को याद किया मैंने

हर एक क्रिया में देखा मैंने मानव का मेहनत भरा संसार

केवल सत्याबोध में परमानंद को पाया मैंने।

तू जग कर मुझ पर नई मुस्कान बरसाती है, तो

मैं बीते हुए दिनों की ओर भागती हूँ

मेज़ पर रखे बरतन चमकते हैं धूप से

आँगन में बिखरे पड़े हैं खिलौने अनेक।

बालमणि अम्मा
About the poet

बालमणि अम्मा

मलयालम की समादृत कवयित्री-लेखिका-अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : नालापत बालमणि अम्मा जन्म : 19/07/1909 | पुन्नायुर्कुलम, केरला निधन : 29/09/2004 | कोचीन, केरला

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