अमित्रता

हरे प्रकाश उपाध्यायहरे प्रकाश उपाध्याय

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आज कुछ मित्रों को अमित्र बनाया

यह काम पूरी मेहनत व समझदारी से किया

ज़रूरी काम की तरह

ज़िंदगी में ज़रूरी हैं मित्रताएँ

तो अमित्रता भी ग़ैरज़रूरी नहीं

जो अमित्र हुए

हो सकता है वे मित्रों से बेहतर हों

मेरी शुभकामना है कि वे और थोड़ा-सा बेहतर हों

किसी मित्र के काम आएँ

इतना कि अगली बार जब कोई उन्हें अमित्र बनाने को सोचे

तो उसकी आत्मा उनकी रक्षा करे

तब तक मेरी यह प्रार्थना है

अमित्रों का दिल

उनके दल से मेरी रक्षा करे

अमित्र उन संभावनाओं की तरह हैं

जिन्हें अभी पकना है

जिनका मित्र मुझे फिर से बनना है।

हरे प्रकाश उपाध्याय
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हरे प्रकाश उपाध्याय

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