अफ़वाहों का ड्राफ़्ट

फ़रीद ख़ाँफ़रीद ख़ाँ

1 min read · 12.4K reads

अफ़वाहें कर रही हैं नेतृत्व।

लाल किले पर फहराई जाती हैं अफ़वाह

और मिठाई बांटी जाती है लोगों में।

कल ही संसद में पेश की गई एक अफ़वाह

दो तीन दिन बहस होगी उस पर

फिर पारित हो जाएगी क़ानून बनकर।

पुरातत्ववेत्ताओं ने खुदाई से निकाल कर दी हैं अफ़वाहें।

संग्रहालय में रखी हैं अफ़वाहों की तोप-तलवारें।

स्कूलों का उसी से बना है पाठ्यक्रम। उसी से बनी है प्रार्थनाएँ।

कक्षा में भूगोल का शिक्षक ब्लैक बोर्ड पर लकीरें खींचकर

बनाता है अलग अलग अफ़वाहों के मानचित्र।

चिंतन समिति बड़ी मेहनत और लगन से तैयार करती है

अफ़वाहों का ड्राफ़्ट।

अफ़वाहों पर विस्तार से होती हैं बातें।

समाज में फैलाई जाती है उनके प्रति जागरूकता।

मुहल्लों में बनाए जाते हैं इस पार, उस पार।

दुश्मनों को देख नसों में रक्त का प्रवाह तेज़ हो,

सरहदों पर लगाए जाते हैं अफ़वाहों के कँटीले तार।

फ़रीद ख़ाँ
About the poet

फ़रीद ख़ाँ

फ़रीद ख़ाँ

View profile & all 24 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like