Selected Quotes
Poetry & Stories
सिन्दूर - अविनाश मिश्र
क्या वह बता सकता थाकि अब तुम मेरी नहीं रहीं
बेन्दा - अविनाश मिश्र
यूँ तुम देखने में बुरे नहींउम्र भी तुम्हारी कुछ खास नहीं
बिन्दिया - अविनाश मिश्र
वह तुम्हारा कोई स्वप्न थीया अभिलाषा
काजल - अविनाश मिश्र
तुम्हारी आँखों में बसावह रात की तरह था
नथ - अविनाश मिश्र
वह सही वक़्त बताती हुई घड़ी हैचन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता है
अविनाश मिश्र: Quick Answers
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Poems & Stories by अविनाश मिश्र
सिन्दूर - अविनाश मिश्र
क्या वह बता सकता थाकि अब तुम मेरी नहीं रहीं
बेन्दा - अविनाश मिश्र
यूँ तुम देखने में बुरे नहींउम्र भी तुम्हारी कुछ खास नहीं
बिन्दिया - अविनाश मिश्र
वह तुम्हारा कोई स्वप्न थीया अभिलाषा
काजल - अविनाश मिश्र
तुम्हारी आँखों में बसावह रात की तरह था
नथ - अविनाश मिश्र
वह सही वक़्त बताती हुई घड़ी हैचन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता है
कर्णफूल - अविनाश मिश्र
बहुत बड़े थे वे और भारी भीतुम्हारे कानों की सबसे नर्म जगह पर
गजरा - अविनाश मिश्र
मैं तुम्हारे अधरों की अरुणाई नहींतुम्हारे नाख़ूनों पर चढ़ी गुलाबी चमक नहीं
मंगलसूत्र - अविनाश मिश्र
वह वास्तविक निकष है एक तय निष्कर्ष काया मुझे अनाकर्षित करने की कोई क्षमता
बाजूबन्द - अविनाश मिश्र
वह आमन्त्रित हैमैं भी
मेंहदी - अविनाश मिश्र
इस असर से तुम्हारी हथेलियाँकुछ भारी हो जाती थीं
चूड़ियाँ - अविनाश मिश्र
तुम्हें न देखूँ तब भीबँधा चला आता था
अँगूठी - अविनाश मिश्र
इसका मुहावरा ही और हैयह सबसे पहले आती है
Selected Quotes by अविनाश मिश्र (चुनिंदा उद्धरण)
वह तुम्हारा कोई स्वप्न थीया अभिलाषाक्या वह बता सकता थाकि अब तुम मेरी नहीं रहींयूँ तुम देखने में बुरे नहींउम्र भी तुम्हारी कुछ खास नहींतुम्हारी आँखों में बसावह रात की तरह थावह सही वक़्त बताती हुई घड़ी हैचन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता हैबहुत बड़े थे वे और भारी भीतुम्हारे कानों की सबसे नर्म जगह परVideos on अविनाश मिश्र
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