वह सही वक़्त बताती हुई घड़ी है
चन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता है
और समुद्र को भी
चन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता है
और समुद्र को भी

क्या वह बता सकता थाकि अब तुम मेरी नहीं रहीं
यूँ तुम देखने में बुरे नहींउम्र भी तुम्हारी कुछ खास नहीं
वह तुम्हारा कोई स्वप्न थीया अभिलाषा
तुम्हारी आँखों में बसावह रात की तरह था
बहुत बड़े थे वे और भारी भीतुम्हारे कानों की सबसे नर्म जगह पर