वह आमन्त्रित है
मैं भी
अन्य भी
प्रथम पुरुष के लिए वह अर्गला है
मध्यम के लिए आश्चर्य
अन्य के लिए आकांक्षा
मैं भी
अन्य भी
प्रथम पुरुष के लिए वह अर्गला है
मध्यम के लिए आश्चर्य
अन्य के लिए आकांक्षा

क्या वह बता सकता थाकि अब तुम मेरी नहीं रहीं
यूँ तुम देखने में बुरे नहींउम्र भी तुम्हारी कुछ खास नहीं
वह तुम्हारा कोई स्वप्न थीया अभिलाषा
तुम्हारी आँखों में बसावह रात की तरह था
वह सही वक़्त बताती हुई घड़ी हैचन्द्रमा को उसमें कसा जा सकता है