About अतुल
नई पीढ़ी के कवि-लेखक।
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Poetry & Stories
मौत
घड़ी की सूई से रेस लगाती है मौतफूलती साँसों के साथ
सबसे पहले
सबसे पहले ज़ुबान चली गईगूँगे ख़ामोश सब सुन रहे थे
पत्र
तुम जो देखते हो ग़रीब की ठठरियाँ और उसमें निहार लेते हो तुम्हारा सौंदर्यबोधतुम्हें चाहिए एक ढाँचे में बदलता हुआ मनुष्य
निर्वेद
रेत के स्वाद से दिनों में महीन खुरदुरी-सी रातें, किवाड़ बंद कमरे में
एक प्रेम के अवसान से
तुम कभी प्रेम में न हुएन कभी मैं तुम्हारा प्रेमी
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Kavishala has 13 poems and stories by अतुल, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अतुल
मौत
घड़ी की सूई से रेस लगाती है मौतफूलती साँसों के साथ
सबसे पहले
सबसे पहले ज़ुबान चली गईगूँगे ख़ामोश सब सुन रहे थे
पत्र
तुम जो देखते हो ग़रीब की ठठरियाँ और उसमें निहार लेते हो तुम्हारा सौंदर्यबोधतुम्हें चाहिए एक ढाँचे में बदलता हुआ मनुष्य
निर्वेद
रेत के स्वाद से दिनों में महीन खुरदुरी-सी रातें, किवाड़ बंद कमरे में
एक प्रेम के अवसान से
तुम कभी प्रेम में न हुएन कभी मैं तुम्हारा प्रेमी
कीड़ा
गर प्रेम का बोझ दुगना न होता साथीमेरी आँखों में तुम्हारे सूरत-ओ-जमाल के सिवा
अबेसस
सेंसेक्स उचक कर बढ़ता हैपारा रोज़ फिसलता है दिल्ली के भीतर
ग्रे
हम जो छुप छुप कर करते रहे पिताओं से ढेर सारी नफ़रतमगर दिखते रहे निसार उनकी मोहब्बत और याद में जब-तब
मिट्टी और लकड़ी
जब ईश्वर मर जाएगानीत्शे भी और मैं भी
भरोसे का सवाल
चलो, छोड़ो, जाने दोएक और शाम डूबी
भाषा
एकभाषा के लिए मैं
विस्मृति
क्या बीत जाने सेसचमुच बीत जाती है बात?—
Selected Quotes by अतुल (चुनिंदा उद्धरण)
तुम कभी प्रेम में न हुएन कभी मैं तुम्हारा प्रेमीजब ईश्वर मर जाएगानीत्शे भी और मैं भीरेत के स्वाद से दिनों में महीन खुरदुरी-सी रातें, किवाड़ बंद कमरे मेंहम जो छुप छुप कर करते रहे पिताओं से ढेर सारी नफ़रतमगर दिखते रहे निसार उनकी मोहब्बत और याद में जब-तबघड़ी की सूई से रेस लगाती है मौतफूलती साँसों के साथचलो, छोड़ो, जाने दोएक और शाम डूबीVideos on अतुल
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