करती है आग्रह
डपट भी देती है कभी-कभी—
उतरो तो पहले
तैरना-डूबना बाद में।
कविता नदी है
नदी प्रेम
और प्रेम...
एक बरसाती रात
तट से बँधी नाव खोल देना
भूलने का करना प्रयत्न—अंतिम!
तज देना संदेश की आशा
लौटना घर की तरफ़
(जो है नहीं, कहीं नहीं!)
और चुपके से रो देना।








