कुछ सुझाव धरती पर

आसित आदित्यआसित आदित्य

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मोहब्बत में आज़ादी हार जाने का

अपना सुख है

मत भागना उसकी बाँहों से दूर

बुद्ध को याद करते हुए बिरयानी मत खाना

ज़ायका बिगड़ जाता है

याद रखना

ईर्ष्या प्रेम के देस की स्थायी निवासी है

ख़ुद पर नज़र गड़ाए रखना

कि दुश्मन के प्रति

समंदर-सी गहरी घृणा न पनपे

छोटे-छोटे गड्ढों में जमा करना

घृणा का पानी

सर्दी की रात गर आइसक्रीम खाओ

तो मत डरना खाँसी से

प्रेम करो

तो हिसाब मत करना

घाटा होगा

आसित आदित्य
About the poet

आसित आदित्य

नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।

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