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आशीष यादवआशीष यादव9 Oct 1998

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कुछ पौराणिक कथाओं में वर्णित है

कि धरती शेषनाग के फन पर टिकी है

पर जब मैं देखता हूँ मज़दूर साथियों के

फ़ौलादी कंधे पर रखा फावड़ा

पीठ पर दुधमुहाँ बच्चा बाँधे

ईंट ढोंती औरतें

एक हाथ से

कमर पर पानी का घड़ा टिकाए

दूसरे से सर पर लकड़ी का गठ्ठर धरे

जंगल से लौटती लड़कियाँ

मुझे महसूस होता है

धरती शेषनाग के फन पर नहीं

इन मेहनतकश लोगों के

पीठ, सर और कंधे पर टिकी हुई है।

आशीष यादव
About the poet

आशीष यादव

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। मूल नाम : आशीष यादव जन्म : 09/10/1998 | ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

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