सच

आशीष यादवआशीष यादव9 Oct 1998

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एक रेगिस्तान से ज़्यादा

समझती है सूखी नदी प्यास की तड़प

नंगा कहाँ समझ सका है

नंगेपन को

वह औरत जानती है

नंगा होने का मतलब

जिसके ब्लाउज़ का एक कोर उधड़ा हुआ है

भूखे पेट से ज़्यादा

आधे भरे पेट वाला व्यक्ति

महसूस करता है भूख को

साथ रहने से ज़्यादा

बिछड़ने पर लोगों ने जाना है

प्रेम की गहराई को

किसी भी चीज़ का अभाव

उतना कष्टदायी नहीं रहा है

जितना उस चीज़ के

थोड़ा हासिल होने पर

उसका भी छीन लिया जाना।

आशीष यादव
About the poet

आशीष यादव

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। मूल नाम : आशीष यादव जन्म : 09/10/1998 | ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश

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