About अमन त्रिपाठी
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक। मूल नाम : अमन त्रिपाठी जन्म : 02/12/1997 | देवरिया, उत्तर प्रदेश
Selected Quotes
Poetry & Stories
ओ माँ
सरयू के किनारे अनवरत प्रार्थना में लीन माँ,यमुना का पानी मैं पीता हूँ
प्यार करने में असमर्थ
बचपन ज़रूर कुछ कटु रहाबाद के जीवन में भी दुनिया और लोग अपनी
बन्नी कर लो आज सिंगार बन्ना तुझे ब्याहने आएगा
तुमने कहा कि ब्याह की सबसे बड़ी ख़ुशीतुम्हें यह है
एक क्षण की याद
कैसे करूँगा अपनी ईमानदार लेकिनकटु उक्तियों का प्रायश्चित
वसंत में
वसंत मेंजब कोई आएगा
About अमन त्रिपाठी
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।
मूल नाम : अमन त्रिपाठीजन्म : 02/12/1997 | देवरिया, उत्तर प्रदेश
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक। अमन त्रिपाठी was born on 2 December 1997. Associated place: देवरिया, उत्तर प्रदेश. Kavishala has 20 poems and stories by अमन त्रिपाठी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.अमन त्रिपाठी: Quick Answers
Who is अमन त्रिपाठी?
When was अमन त्रिपाठी born?
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Poems & Stories by अमन त्रिपाठी
ओ माँ
सरयू के किनारे अनवरत प्रार्थना में लीन माँ,यमुना का पानी मैं पीता हूँ
प्यार करने में असमर्थ
बचपन ज़रूर कुछ कटु रहाबाद के जीवन में भी दुनिया और लोग अपनी
बन्नी कर लो आज सिंगार बन्ना तुझे ब्याहने आएगा
तुमने कहा कि ब्याह की सबसे बड़ी ख़ुशीतुम्हें यह है
एक क्षण की याद
कैसे करूँगा अपनी ईमानदार लेकिनकटु उक्तियों का प्रायश्चित
वसंत में
वसंत मेंजब कोई आएगा
मृत्यु का माहात्म्य
एक व्यक्ति जिसके चले जाने से कोई ख़ाली जगह नहीं बनेगीदरवाज़ा खोलकर चला जाएगा अपना निर्वासन और अपनी उपेक्षा साथ लेकर
नष्ट होने से हम इतना तो नहीं डरते थे
मौतों पर हम बहुत कमलगभग नहीं के बराबर रोते थे
एक कोने में
नगरपालिका चुनाव का वोट माँगनेविधायक की सुंदर तन्वंगी बहू का
या फिर
जाने किन ग्रहों की महादशा से निरंतर पीड़ित थे वेउन लोगों के जीवन में कभी उनके स्वप्न मुताबिक़
मध्यवर्ग
अगर कभी कुछ कहना चाहूँ मेरे मुँह पर थूक दीजिएजहाँ लिखा हो नहीं मूतना वहीं खड़े हो मूत दीजिए
सोचता था
ऐसा सोचता था,कभी मियाँ नज़ीर या मीर तक़ी मीर की तरह
शुभ्रा
मैं तुम्हें एक एकदम नए नाम से पुकारना चाहता हूँप्रेम में जलते हुए बुख़ार में जलने वाले क़िस्सों से बहुत ईर्ष्या रखता आया हूँ
Selected Quotes by अमन त्रिपाठी (चुनिंदा उद्धरण)
बचपन ज़रूर कुछ कटु रहाबाद के जीवन में भी दुनिया और लोग अपनीअगर कभी कुछ कहना चाहूँ मेरे मुँह पर थूक दीजिएजहाँ लिखा हो नहीं मूतना वहीं खड़े हो मूत दीजिएवसंत मेंजब कोई आएगासरयू के किनारे अनवरत प्रार्थना में लीन माँ,यमुना का पानी मैं पीता हूँएक व्यक्ति जिसके चले जाने से कोई ख़ाली जगह नहीं बनेगीदरवाज़ा खोलकर चला जाएगा अपना निर्वासन और अपनी उपेक्षा साथ लेकरऐसा सोचता था,कभी मियाँ नज़ीर या मीर तक़ी मीर की तरहVideos on अमन त्रिपाठी
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