नगरपालिका चुनाव का वोट माँगने
विधायक की सुंदर तन्वंगी बहू का
घर में जब उल्लसित उमंगित प्रवेश हुआ
उसकी हँसी से आंदोलित होकर
घर की स्त्रियाँ यूँ खड़ी हो गईं मानो
अपने ही बीच के मनुष्य का उनको
इतनी ऊँचाई पर छुआ जाना
नागवार लग रहा हो और ईर्ष्या ने
उनको सीधा खड़ा कर दिया हो या फिर
वे एक प्रसन्न कौतूहल से उस दुष्प्राप्य आदर्श को
ज़रा-सा निहार पाने की अदम्य आकांक्षा लेकर
एक कोने में खड़ी हो गई हों








