मध्यवर्ग

अमन त्रिपाठीअमन त्रिपाठी2 Dec 1997

1 min read · 12.4K reads

अगर कभी कुछ कहना चाहूँ मेरे मुँह पर थूक दीजिए

जहाँ लिखा हो नहीं मूतना वहीं खड़े हो मूत दीजिए

लोकतंत्र की बँसवाड़ी की गढ़िए भुतही दंतकथाएँ

अधिकारों की बात चले तो पुलिस बुलाकर सूत दीजिए

और आप, आप इसको इस तरह से सुनिए न कि आप कुछ नहीं जानते हैं और बिल्कुल मासूम हैं और सुनते हुए याद कीजिए कि आपके ड्रॉइंग रूम में दो सोफ़े हैं और डाइनिंग टेबल पर लेग पीस के साथ मल्टीनेशनल कंपनी में बेटे के प्लेसमेंट के बारे में बातचीत आज रात ही होनी है। आप इसको इस तरह से भी सुनिए न कि आस्था चैनल पर फलाँ शांतिदूत की मीठी-मीठी झिड़की जिस हीहीहीही के साथ सुनते हैं और धर्मसंस्थापनार्थाय वाली भंगिमा में बैठ शांतिदूत की निहायत स्त्रीविरोधी बात पर चार स्त्रीगुप्तांगकेंद्रित गालियाँ समूची स्त्री जाति की ओर उछालते हैं।

अमन त्रिपाठी
About the poet

अमन त्रिपाठी

नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक। मूल नाम : अमन त्रिपाठी जन्म : 02/12/1997 | देवरिया, उत्तर प्रदेश

View profile & all 20 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like