अगर कभी कुछ कहना चाहूँ मेरे मुँह पर थूक दीजिए
जहाँ लिखा हो नहीं मूतना वहीं खड़े हो मूत दीजिए
लोकतंत्र की बँसवाड़ी की गढ़िए भुतही दंतकथाएँ
अधिकारों की बात चले तो पुलिस बुलाकर सूत दीजिए
और आप, आप इसको इस तरह से सुनिए न कि आप कुछ नहीं जानते हैं और बिल्कुल मासूम हैं और सुनते हुए याद कीजिए कि आपके ड्रॉइंग रूम में दो सोफ़े हैं और डाइनिंग टेबल पर लेग पीस के साथ मल्टीनेशनल कंपनी में बेटे के प्लेसमेंट के बारे में बातचीत आज रात ही होनी है। आप इसको इस तरह से भी सुनिए न कि आस्था चैनल पर फलाँ शांतिदूत की मीठी-मीठी झिड़की जिस हीहीहीही के साथ सुनते हैं और धर्मसंस्थापनार्थाय वाली भंगिमा में बैठ शांतिदूत की निहायत स्त्रीविरोधी बात पर चार स्त्रीगुप्तांगकेंद्रित गालियाँ समूची स्त्री जाति की ओर उछालते हैं।








