मृत्यु का माहात्म्य

अमन त्रिपाठीअमन त्रिपाठी2 Dec 1997

1 min read · 12.4K reads

एक व्यक्ति जिसके चले जाने से कोई ख़ाली जगह नहीं बनेगी

दरवाज़ा खोलकर चला जाएगा अपना निर्वासन और अपनी उपेक्षा साथ लेकर

और जैसा कि होता आया है लगातार उपस्थित लेकिन निरंतर उपेक्षित व्यक्तियों के साथ

उसके भी चले जाने पर लोग उमड़ पड़ेंगे अपनी शर्म और नज़दीकी दिखाने की युयुत्सा में

और ऐसा भी होता ही आया होगा कि

उस व्यक्ति के साथ लगातार बने रहे लोग

उसके जाने के बाद आए लोगों में

शामिल होने के लिए नहीं आएँगे

इस तरह

इन दो तरह के लोगों के द्वंद्व से या फिर

उपस्थित लोगों के स्वयं ही के विरोधाभासों से

स्मृति और संबंधों और सामाजिकता की एक परीक्षा संपन्न होगी

एक व्यक्ति के चले जाने की घटना के बाद के अनुष्ठान में

कहने की आवश्यकता नहीं पर मुँह खोलकर कह दिया जाए—

इस पूरे अनुष्ठान में

इस पूरी शर्म में

स्त्रियाँ कहीं नहीं हैं

अमन त्रिपाठी
About the poet

अमन त्रिपाठी

नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक। मूल नाम : अमन त्रिपाठी जन्म : 02/12/1997 | देवरिया, उत्तर प्रदेश

View profile & all 20 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगाये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगालिबास-ए-ज़िंदगी फट जाएगा मैला नहीं होगा— मुनव्वर रानाचले मक़्तल की जानिब और छाती खोल दी हम नेचले मक़्तल की जानिब और छाती खोल दी हम नेबढ़ाने पर पतंग आए तो चर्ख़ी खोल दी हम ने— मुनव्वर रानाकुछ नहीं चाहने वाली लड़कीसोलह की यह लड़की दो-तीन साल पहले तकपेड़-पौधों पर रखती थी पाँव— ऐश्वर्य राजआंबेडकर“तुम्हारे दीन मुखों को देखकरकरुणा भरे स्वरों को सुनकर— बी. गोपाल रेड्डीमेरा और मेरी पृथ्वी का(लंबी कविता के कुछ अंश)वैसा ही हूँ, दुख मेरी गोद का बच्चा, बार-बार— हीरेन भट्टाचार्यतालाब-1मैं क्षिति तल परतुम्हारे सुख-दुख का— ब्रजरतन जोशी