मैं इतना अच्छा आदमी हूँ कि सनक गया हूँ
अँधेरे में मुझे आता देख एक साठ साला औरत अपना आँचल सँभालती है
ये शर्म की बात उससे अधिक मेरे लिए
मैं अपने सौ से भी ज़्यादा टुकड़े कर सकता हूँ
मेरे मस्तक में कीड़ों का साम्राज्य उग आया है
उनकी टाँगें मेरे सिर पर छोटे-छोटे सींगों-सी बढ़ रही हैं
आप मुझे कुछ भी ऑफ़र कर सकते हैं—
बीड़ी, गांजा या बंदूक़।








