स्त्री

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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नन्हीं परी का सिर सहलाता हूँ

वह मेरी हथेली

अपनी ऊँगलियों में लपेट लेती है

मुझे लगता

ईश्वर ने मेरा हाथ थामा है

नि:शंक सोते देखता हूँ जब पत्नी को

तो पृथ्वी नीमनींद-सी शांत लगती है

जबकि पलकों में उसके

घर की सारी बलाएँ क़ैद रहती हैं

इस समय

ईश्वर नींद से गुज़र रहा होता है

जब माँ को सोते हुए देखता हूँ

तो लगता है

ईश्वर नींद में भी

सबके लिए उतना ही चिंतित है

जीवन में समस्त ऊर्जा स्रोत

जिन-जिन स्त्रियों से मिलता रहा

उनकी जागती-सोती आँखों से

मैंने प्रार्थनाओं से भरा स्वर्ग देखा है

ईश्वर मिथक नहीं सच है

और आपके इर्द-गिर्द हाथ थामे

यक़ीन दिलाता है कि

ईश्वर कोई पुरुष नहीं होता

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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