मैं सड़क हूँ

यतीश कुमारयतीश कुमार21 Aug 1976

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वे चल रहे हैं

संख्याओं के समीकरण तोड़ते हुए

और मैं चुपचाप उनकी धड़कनें सुन रहा हूँ

धड़कनों में इन दिनों

धौंकनियों का स्वर एकालाप है

अलाप अब महाप्रलाप है

वे चल रहे हैं

तो धरती चाँद को लिए

एक तरफ़ झुकती जा रही है

असंख्य पदचापों में

कुछ ध्वनियाँ तांडव-सी धमकती हैं

पर यहीं जन्मते शिशुओं की चाप

इन सबमें भारी है

उससे भी ज़्यादा भारी है

उन माताओं की छातियाँ

जो दूध की नदियाँ लिए

दौड़ती-भागती जा रही हैं

अन्नपूर्णा ढलान पर फिसल रही है

और सड़कों पर पूजा जारी है

सड़कें अवरोह से आरोह की तरफ़ मुखर हैं

पसीने का काढ़ा

तिल्ली में जमा पित्त है

गाढ़ा रक्त पसीने-सा तरल है

करुणा प्यासी है

नीर नदी बहा रही है

बहाव ख़ुद असमंजस में है

कथरी में दबा भविष्य

अपनी मुट्ठी भींचता है

आँखों से चिंगारियाँ नहीं

ललकारती चुनौतियाँ हैं

इन्हें देख

सूरज और जल रहा है

झंझा और बौखला रही है

वर्षा रह-रहकर तड़प उठती है

बिजली बस कौंधे जा रही है

पृथ्वी को पट्टियों-सा बाँधे देखता हूँ

अजन्मे बच्चे ने चलकर

अभी-अभी नापी है पूरी धरती।

यतीश कुमार
About the poet

यतीश कुमार

सुपरिचित कवि-लेखक। कविताओं की दो पुस्तकें 'अन्तस की खुरचन' और 'आविर्भाव' शीर्षक से प्रकाशित । मूल नाम : यतीश कुमार जन्म : 21/08/1976 | मुंगेर, बिहार 21 अगस्त 1976 को मुंगेर (बिहार) में जन्मे यतीश कुमार ने कविता और कहानी के साथ-साथ चर्चित उपन्यासों, कहानियों व…

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