इस देश में
जो रूसी सीख लेता है
रूस में बस जाने की सोचता है
जो जर्मन सीखता है जर्मनी में बस जाने की फ़िराक़ में होता है
जापानी सीखने वाले के मन में
तोक्यो उछाल मारता है
फ़्रेंच सीखने वाला
फ़्रांस की दूरियाँ गुनता है
और यहाँ रहने पर अफ़सोस जताता है
जो अँग्रेज़ी जान लेता है
वह तो मानता ही है
कि दुनिया के सारे बड़े शहरों के रास्ते
खुल गए हैं उसके वास्ते
लेकिन जो हिंदी जानता है केवल या मराठी या गुजराती या पंजाबी या तेलुगु
वह अपनी भाषा में घुलता रहता है
अपने ही राज्य में बंदी
भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी जानने वाले
नई राजनीति में अपनी जगह ढूँढ़ते हैं
अब जो सिर्फ़ मुंडा या उड़ाँव जानते हैं
कुड़ुख या गोंडी या झाड़ी बोली
उनके घरों को कभी भी रौंदा जा सकता है बुलडोज़र से।








